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माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007

फिजिकल सिग्नस

  • माता-पिता और वरिष्ठ नागरिको का भरणपोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 प्रदेद्गा में 23 अगस्त 2008 से लागू
  • उक्त अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन हेतु राज्य शासन द्वारा म0प्र0 माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण नियम 2009, अधिसूचना दिनांक 2 जुलाई 2009 के द्वारा जारी
  • धारा 7 (1) के तहत प्रदेश के समस्त जिलो के उपखण्डों में भरण पोषण अधिकरण गठित.
  • धारा 15 (1) के तहत प्रत्येक जिले में अपील अधिकरण गठित ।
  • धारा 18(1) के तहत सामाजिक न्याय विभाग के समस्त जिला अधिकारी, भरण पोषण अधिकारी के रुप में पदाभिहित

प्रदेश के भरण पोषण अभिकरणों में कुल 46 प्रकरण दर्ज है ।

उक्त अधिनियम के मुख्‍य उददेश

  • वे अभिभावक और वरिष्ठ नागरिक जो कि अपने आय अथवा अपनी संपत्ति के द्वारा होने वाली आय से अपना भरण पोषण करने में असमर्थ है, वे अपने व्यस्क बच्चों अथवा संबंधितों से भरण पोषण प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते है।
  • अभिभावक में सगे और दत्तक माता पिता और सोतेले माता और पिता सम्मिलित है ।
  • प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक जो 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का है, वह अपने संबधितों से भी भरणपोषण की मांग कर सकता है, जिनका उनकी संपत्ति पर स्वामित्व है अथवा जो कि उनकी संपत्ति के उत्तराधिकारी हो सकते है ।
  • वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा एवं परित्याग एक संघिन अपराध है, जिसके लिये रुपये 5000/- का जुर्माना या तीन माह की सजा या दोनों हो सकते है ।
  • अधिकरण द्वारा मासिक भरणपोषण हेतु अधिकतम राशि रुपये 10,000/- प्रतिमाह तक का, आदेश किया जा सकता है ।
  • सभी शासकीय चिकित्सालयों में वरिष्ठ नागरिकों को बिस्तर उपलब्ध कराया जायेगा तथा चिकित्सालयों में विद्गोष पंक्तियों का प्रबंध किया जायेगा ।