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सुधारात्मक सेवाए

अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 का क्रियान्वयन

अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 के अन्तर्गत ऐसे वयस्क अपराधियों को जो आजीवन कारावास अथवा मृत्युदण्ड से दण्डित न हो, को कारावास के स्थान पर सदाचार की परिवीक्षा पर छोड़ने की कार्यवाही की जाती है। न्यायिक दण्डाधिकारी द्वारा प्रकरणों पर परिवीक्षा अधिकारी से अपराधी के संबंध में जांच रिपोर्ट प्राप्त कर परिवीक्षा पर छोड़ने का आदेश पारित किया जाता है तथा निर्धारित अवधि तक परिवीक्षा अधिकारी की देखरेख में रखने का आदेश भी दिया जाता है। इस अधिनियम के अन्तर्गत प्रदेश में विभाग द्वारा परिवीक्षा अधिकारियों की सेवाएं उपलब्ध कराई गई है।

भिक्षावृति निवारण योजना

मध्यप्रदेश भिक्षावृति निवारण अधिनियम, 1973 वर्तमान में इन्दौर एवं उज्जैन नगर निगम क्षेत्र में प्रभावशील है। इसके अन्तर्गत 1 भिक्षुक प्रवेश गृह एवं प्रमाणित संस्था इन्दौर में संचालित है। संस्था अन्तर्गत वर्तमान में कुल 16 भिक्षुक लाभान्वित हो रहे है।

अन्य कार्यक्रम

मध्यप्रदेश निराश्रितों एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता अधिनियम 1970 के तहत म0प्र0 निराश्रित एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता नियम 1999 एवं संशोधित नियम 2007 बनाये गये हैं । अधिनियम के अन्तर्गत कृषि उपज पर क्रेताओं से संग्रहित निराश्रित शुल्क की राशि का निराश्रितों पर व्यय प्रावधानित किया गया हैं । नियमों में निराश्रितों के लिये आश्रमों की स्थापना,ऐसे निराश्रित जो फुटपाथ पर रात व्यतीत करते हो,उन्हें रात्रि गुजारने के लिये रैन बसेरा, केन्द्र की स्थापना, निःशक्त बच्चों के लिये रहवासी अथवा गैर रहवासी विशेष शालाओं की स्थापना तथा निराश्रितों एवं निर्धनों के लिये रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना का प्रावधान किया गया हैं । इसके अतिरिक्त निराश्रित निधि का उपयोग मुख्‍यमंत्री कन्यादान योजना के क्रियान्वयन, निराश्रितों के कृत्रिम अंग एवं उपकरण प्रदाय,निराश्रितों के कल्याण हेतु कार्यशाला सेमीनार,प्रदर्शन,चलित इकाइयों की स्थापना समुदाय आधारित पुनर्वास योजना आदि के लिये किया जाना भी प्रावधानित किया गया हैं ।

वृद्धाश्रमों का संचालन

निराश्रित वृद्धों के समग्र कल्याण एवं संरक्षण के लिये प्रदेद्गा में आवश्‍यकतानुसार वृद्धाश्रमों की स्थापना को राज्य शासन द्वारा प्रोत्साहित किया जाता हैं । वृद्धाश्रमों की स्थापना के लिये सहायक अनुदान दिया जाता है। मध्यप्रदेश निराश्रितों एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता अधिनियम, 1970 के तहत बने नियमों में केन्द्र या राज्य विधि के अधीन गठित या रजिस्ट्रीकृत कोई न्यास/प्राधिकरण /निकाय उत्कृष्ट संस्था को वृद्वाश्रम संचालन हेतु जिला कलेक्टर की अनुशंसा के आधार पर अनुदान दिये जाने का प्रावधान है । भारत सरकार की सहायता अनुदान योजना के अन्तर्गत भी 25 वृद्धों की परियोजना हेतु 90 प्रतिशत अनुदान देने की योजना है तथा भारत सरकार की ही वृद्धाश्रम भवन निर्माण योजना हेतु 15.00 लाख रूपये का 90 प्रतिशत सहायक अनुदान दिये जाने का प्रावधान है । वर्तमान में प्रदेश में 51 जिलों में 82 वृद्धाश्रम संचालित है । वृद्धों की राष्ट्रीय नीति क्रियान्वयन हेतु सीनियर सिटीजन फोरम का गठन,आश्रय, द्गिाक्षा, स्वास्थ्य, स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी एवं पंचायतराज संस्थाओं की भूमिका आदि निर्धारित कर मुख्‍य बिन्दुओं पर कार्यवाही की जाती है ।